Shein, क्लब फैक्ट्री जैसी कई चीनी कंपनियां भारतीय गारमेंट मार्किट पर कब्जा करने में लगी हैं

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पिछले कुछ ही सालों में चीन का टेक्सटाइल व्यापार बहुत तेजी से बढ़ा है। पिछले साल चीन ने लगभग 200 बिलियन डॉलर का टेक्सटाइल एक्सपोर्ट किया। वैश्विक टेक्सटाइल एक्सपोर्ट में चीन का 40 प्रतिशत हिस्से पर कब्जा है और बांग्लादेश, वियतनाम और भारत जैसे देश चीन के बाद आते हैं।

भारत के बाज़ार में भी कुल टेक्सटाइल इम्पोर्ट्स में से 40 प्रतिशत हिस्सा चीन से ही आता है। भारत इतनी मजबूत घरेलू टेक्सटाइल इंडस्ट्री होने के बावजूद हर साल साढ़े तीन बिलियन डॉलर का टेक्सटाइल इम्पोर्ट करता है। पिछले साल ही भारत ने 460 मिलियन डॉलर का synthetic yarn, 360 मिलियन डॉलर का synthetic fabric और 140 मिलियन डॉलर के बटन, जिप्पर, हैंगर्स और अन्य छोटा मोटा सामान इम्पोर्ट किया था।

भारत synthetic yarn के सबड़े बड़े आयातकों और कॉटन के सबसे बड़े निर्यातकों में से एक है। अधिकतर synthetic yarn और अन्य कच्चा माल दक्षिण पूर्व एशियाई देशों जैसे थाईलैंड, ताइवान, दक्षिण कोरिया, इंडोनेशिया, मलेशिया और चीन से ही इम्पोर्ट करता है।

पिछले साल भारत ने Purified terephthalic acid (PTA) पर से ढाई प्रतिशत anti-dumping duty को हटा दिया था, जिसके बाद इन सब देशों के लिए भारत में अपना एक्सपोर्ट करना और ज़्यादा आसान हो गया था। PTA भारत की टेक्सटाइल इंडस्ट्री के लिए अहम input material है। यह उचित दामों पर आसानी से उपलब्ध हो जाता है।

हालांकि, जब देश में वोकल फॉर लोकल जैसी मुहिम चलाई जा रही है और boycott China मुहिम को सरकार द्वारा बढ़ावा दिया जा रहा है, तो इस क्षेत्र को नकारा नहीं जा सकता। सरकार को चाहिए कि दोबारा इन चीजों पर anti-dumping duty को बढ़ा दिया जाये, ताकि देशभर के उद्योग अपने कच्चे माल को भारत में ही बनाने के लिए प्रेरित हो सकें। भारत की रिलायंस इंडस्ट्री और Indian oil Corporation जैसी कंपनियाँ पहले ही अच्छी क्वालिटी की PTA का उत्पादन कर रही हैं। सरकार को PTA के लिए कच्चे माल पर सब्सिडी देने की ज़रूरत है, ताकि इन उद्योगों को बढ़ावा मिल सके।

भारत के टेक्सटाइल सेक्टर में चीनी प्रभाव को कम करने के लिए सरकार को चीनी टेक्सटाइल इम्पोर्ट पर भी नकेल कसने की ज़रूरत है। पिछले कुछ सालों में SHEIN और club factory जैसी कंपनियों ने भारतीय बाज़ार को काफी हद तक अपनी गिरफ्त में कर लिया है, जबकि भारत के टेक्सटाइल एक्सपोर्ट में कमी देखने को मिली है।

भारत के अधिकतर टेक्सटाइल केंद्र जैसे पंजाब, दिल्ली, आंध्रा प्रदेश से पहले ही टेक्सटाइल का एक्सपोर्ट कम हो चुका है। कोरोना के बाद दुनियाभर के देश चीनी सामान का बहिष्कार कर रहे हैं। ऐसे में भारतीय उद्योगों के पास वैश्विक टेक्सटाइल उद्योग पर कब्जा जमाने का बढ़िया मौका है। पश्चिमी देशों में भारत की बढ़ती goodwill के बाद भारतीय कंपनियों के लिए ऐसा करना और ज़्यादा आसान हो जाएगा।

महाराणा ऑफ इंडिया के अध्यक्ष निखिल ठुकराल के मुताबिक “भारत के बाज़ार बुरी स्थिति में हैं, लेकिन चीन के कारण दुनियाभर में समस्याओं का सामना करना पड़ा है। दुनियाभर में चीन का विरोध बढ़ता जा रहा है, और जापान और अमेरिका जैसे देश चीन से अपनी कंपनियों को बाहर निकालने की तैयारी कर रही हैं। ऐसे में भारत के लिए बढ़िया अवसर है”।

भारत का टेक्सटाइल उद्योग बहुत ही कम समय में PPE किट्स निर्माण का वैश्विक केंद्र बन चुका है। अगर इस उद्योग को ऐसे ही सरकार द्वारा उचित समर्थन मिलता रहता है, तो भारत के इस उद्योग को सफलता प्राप्त करने से कोई नहीं रोक सकता।

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