पहले अमेरिका ने ताइवान को सहायता दी, अब भारत ताइवान के साथ कूटनीतिक रिश्ते मजबूत कर रहा है

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Sino-British Joint Declaration की धज्जियां उड़ाकर Hong-Kong पर अवैध कब्जा जमाने वाले चीन की नज़र अब ताइवान पर टिकी हुई है। चीन ताइवान देश को अपना हिस्सा मानता है और समय-समय पर ताइवान की संप्रभुता को चुनौती देते हुए उसके क्षेत्र में अपने जहाज़ भेजता रहता है। यहां तक कि चीन की गुलाम मीडिया भी Taiwan के खिलाफ जमकर प्रोपेगैंडा फैला रही है। हाल ही में चीनी मीडिया ने दावा किया था कि चीन अगर चाहे तो 11 बिलियन डॉलर के रक्षा बजट वाले ताइवान को मिनटों में कुचल सकता है। ऐसे में Taiwan को मिलने वाले अंतर्राष्ट्रीय कूटनीतिक समर्थन में भी लगातार इजाफा होता जा रहा है। पहले अमेरिका ने ताइवान के साथ एक बड़ा सैन्य समझौता कर चीन को उसकी जगह दिखाई, अब भारत ने भी Taiwan के साथ अपने कूटनीतिक रिश्ते मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ा दिया है।

दरअसल, मीडिया में खबरें आ रही हैं कि भारत ने अनुभवी एवं वरिष्ठ राजनयिक गौरांगलाल दास को ताइवान में तैनात करने का फैसला लिया है। गौरांगलाल दास को चीन एवं अमेरिका में काम करना का खासा अनुभव है और उन्हें भारत-चीन, भारत-अमेरिका के रिश्तों का विशेषज्ञ माना जाता है। वो बीजिंग में 2001 से 2004 के बीच अपनी सेवाएँ दे चुके हैं। इसके अलावा वे वाशिंगटन डीसी में भारतीय दूतावास में काउंसलर के रूप में भी काम कर चुके हैं। भारत ने यह फैसला ऐसा समय में लिया है जब ताइवान ने भी भारत में अपने राजदूत को बदलने का फैसला लिया है।

ताइवान ने ईस्ट एशियन एंड पैसिफिक अफेयर्स के महानिदेशक बाउशुआन गेर को भारत में ताइवान के प्रतिनिधि के रूप में शामिल किया गया है।

बाउशुआन गेर भी एक अनुभवी और वरिष्ठ राजनयिक हैं। ऐसे में दोनों देशों ने यह संकेत दिये हैं कि वे आपसी कूटनीतिक रिश्तों को नया आयाम देना चाहते हैं, जिसे बीजिंग कभी स्वीकार नहीं करेगा।

भारत अब चीन पर दबाव बनाने के लिए ताइवान कार्ड और Hong-Kong कार्ड खेलना शुरू कर चुका है। पहले भारत ने UN में Hong-Kong के मुद्दे पर अपनी चुप्पी तोड़ी, अब भारत ने Taiwan के साथ खुले तौर पर अपने राजनयिक संबंध मजबूत करने का ऐलान कर दिया है। चीन को साफ संकेत दे दिये गए हैं कि ताइवान अकेला नहीं खड़ा है, उसके साथ भारत का पूरा समर्थन है।

अमेरिका तो पहले ही खुलकर ताइवान के समर्थन में आ चुका है। अमेरिका और ताइवान ने हाल ही में 600 मिलियन अमेरिकी डॉलर का एक रक्षा सौदा पक्का किया है जिसके तहत अमेरिका Taiwan को पैट्रियॉट एडवांस्ड कैपेबिलिटी – 3 (PAC-3) मिसाइल मुहैया कराएगा। अमेरिका की ये मिसाइल दुनिया की सबसे बेहतरीन डिफेंस सिस्टम में से एक है। यह मिसाइल डिफेंस सिस्टम दुश्मन की बैलेस्टिक मिसाइल, क्रूज मिसाइल और लड़ाकू जहाजों को पल भर में मार गिराने में सक्षम है। सभी मौसम में दागे जाने वाली इस मिसाइल का निर्माण लॉकहिड मॉर्टिन ने किया है।

यानि अमेरिका और भारत ना सिर्फ ज़मीन से लेकर समुद्र तक में चीन की आक्रामकता का भरपूर जवाब दे रहे हैं, बल्कि Taiwan के मुद्दे पर भी अमेरिका, भारत और ताइवान में एक आपसी समझ विकसित होती दिखाई दे रही है जो आगे चलकर चीन के गले की फांस का रूप ले सकती है।

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