कारगिल युद्ध: लद्दाख के युवाओं ने की थी भारतीय सेना की मदद, जानें कैसे

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युद्ध से जुड़ी कई ऐसी बातें जिनके बारे में आपको जानना चाहिए। इस युद्ध में लद्दाख के युवाओं ने भी सेना की खूब मदद की थी। लद्दाख के लोअर लेह गांव के मोहम्मद अख्तर ने सेना की मदद की थी।

1999 में पाकिस्तान ने कारगिल के सामरिक रूप से महत्वपूर्ण जगहों पर कब्जा कर लिया। कारगिल युद्ध, को ऑपरेशन विजय के नाम से भी जाना जाता है। ये युद्ध भारत और पाकिस्तान के बीच मई और जुलाई 1999 के बीच लड़ा गया। भारत-पाक सीमा से सटे कारगिल क्षेत्रों में सर्दियों कड़ाके की ठंड पड़ती है। दोनों देश हमेशा की तरह इस दौरान अपनी सेनाएं पीछे हटा लेते हैं। पर 1999 में भारत ने तो ऐसा किया पर पाकिस्तान ने ऐसा नहीं किया।

इस युद्ध से जुड़ी कई ऐसी बातें जिनके बारे में आपको जानना चाहिए। इस युद्ध में लद्दाख के युवाओं ने भी सेना की खूब मदद की थी। लद्दाख के लोअर लेह गांव के मोहम्मद अख्तर ने सेना की मदद की थी। ये मदद स्वेच्छा से की गई थी। उन्होंने कई दिनों तक 20-20 किलोमीटर पैदल चलकर सेना को ऊंची-ऊंची पहाड़ियों पर मदद पहुंचाई थी।

जुबर हिल में ये रातभर जगकर सेना तक जरूरी सामान पहुंचाते थे। ऐसे ही थे रिग्जिन नामग्याल नाम के शख्स वे भी पहाड़ों पर ट्रक चलाकार सेना के जरूरी सामान की डिलीवरी करने में मदद करते थे। इस तरह कई ऐसे लोग थे जो सेना की किसी न किसी रूप में मदद करते थे।

पहले तो इन लोगों को डर लगता था लेकिन पाकिस्तान को हराने के लिए लोग खुद आगे आए और देशभक्ति के जज्बे के साथ सेना की हर मोर्च पर मदद की। युद्ध में लद्दाख के लोग अप्रत्यक्ष ही नहीं प्रत्यक्ष रूप से भी योगदान रहा था।

लद्दाखी वीरों ने शौर्य और कुर्बानियों से उनके हर मंसूबों को विफल कर दिया था। कारगिल युद्ध में बर्फ के लड़ाकों ने बिना तोपखाने के चोटियां फतह कर शौर्य की ऐसी इबारत लिखी कि सेना को भी उनके जज्बे को सलाम करना पड़ा।

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