भारत के एक और हिस्से पर चीन की नजर, डेपसांग समतल क्षेत्र में कर रहा अवैध निर्माण

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भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर जारी तनाव को कम करने के लिए चार बार कॉर्प्स कमांडर स्तर की वार्ता हो चुकी है। इसके बावजूद डेपसांग समतल क्षेत्र और दौलत बेग ओल्डी क्षेत्र में चीन अवैध निर्माण करा रहा है। भारत ने इन गतिविधियों का मुद्दा सेना के अधिकारियों की बैठक में उठाया है।

भारत ने भी चीन की चुनौती से निपटने के लिए कमर कस ली है। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने उनके चीनी समकक्ष सहित विशेष प्रतिनिधियों से एलएसी पर सैन्य निर्माण के मुद्दे को हल करने के लिए बातचीत की है। जिसके बाद भारत कूटनीतिक और सैन्य स्तरों समेत चीन के साथ लगातार बातचीत करके हर मुद्दे को सुलझा रहा है।

समाचार एजेंसी ANI के अनुसार, चीन के साथ चल रही बातचीत के दौरान हाल ही में भारत ने चीन को साफ़ साफ़ समझाया है कि उसने जो धूर्तता की, वो सबके सामने है। पहले सैन्य अभ्यास के नाम पर चीन ने पूर्वी लद्दाख में LAC पर सैनिकों को बड़ी संख्या में युद्ध-सामग्री के साथ तैनात किया था। जिसे कमर्शियल सैटेलाइट की मदद से देखा जा सकता है।

सूत्रों ने बताया कि भारतीय पक्ष ने डेपसांग मैदानों और डीबीओ क्षेत्र में चीन के बिल्डअप और निर्माण गतिविधियों के मुद्दे पर अपनी आपत्ति जताई है। भारतीय सेना की गश्त ने चीनी सेना द्वारा पेट्रोलिंग प्वाइंट 10 पर रुकावट पैदा करने का भी मुद्दा उठाया और कहा कि पेट्रोलिंग प्‍वाइंट 13 पर चीनी सेना बड़े स्तर पर निर्माण कार्य में लगी हुई है।

डेपसांग मुद्दे को प्रमुखता से उठाने से पहले, भारतीय पक्ष गलवन घाटी (पीपी -14), पीपी -15, हॉट स्प्रिंग्स, गोगरा और फिंगर क्षेत्र सहित चार घर्षण बिंदुओं पर विस्थापन प्रक्रिया पर चर्चा कर रहा था। कई दौर की चर्चाओं के बाद, दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी थी, जिसके बाद चीनी सेना पीछे हट गई थी। दोनों देशों के बीच हालात 15 जून को गलवन घाटी में हिंसक झड़प के बाद बिगड़े। इस झड़प में दोनों पक्षों के सैनिकों ने अपनी जान गंवा दी थी।

दोनों पक्षों के बीच हुई बैठक के दौरान कई विषयों पर चर्चा हुई। डेपसांग मुद्दे को प्रमुखता से उठाने से पहले भारतीय पक्ष गलवान घाटी (PP-14), PP-15, हॉट स्प्रिंग्‍स, गोगरा और फिंगर एरिया सहित चार बिंदुओं पर विस्‍थापन प्रक्रिया पर चर्चा कर रहा था। कई दौर की चर्चा के बाद दोनों पक्षों में सहमति बनी थी। जिसके बाद चीनी सेना पीछे हट गई थी। 15 जून को भारत और चीनी सेना के बीच हुई खूनी झड़प के बाद युद्ध जैसे हालात बने हुए थे जिसे आपसी बातचीत के जरिए सामान्य किया गया वहीं दोनों ही देशों की सेना के बीच तय हुआ कि, अपनी पुरानी स्थित‍ि में वापस आएँगे।

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