‘देश की संप्रभुता का सम्मान करो, अन्यथा निकाल दिए जाओगे’, रविशंकर प्रसाद का social media कंपनियों को कड़ा संदेश

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इन दिनों फेसबुक में काफी गहमागहमी मची हुई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार फेसबुक के सीईओ मार्क ज़ुकरबर्ग को भय है कि कहीं 59 चीनी एप्स एवं टिक टॉक की भांति फ़ेसबुक और उससे जुड़े एप्स पर प्रतिबंध न लगा दिया जाये। लेकिन सभी अटकलों पर विराम लगाते हुए आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने न केवल स्पष्टीकरण जारी किया, बल्कि सोशल मीडिया कंपनियों को एक अहम, पर कड़ा संदेश भी दिया।

रवि शंकर प्रसाद ने जी20 के डिजिटल अर्थव्यवस्था के संबंध में किए गए वर्चुअल सम्मेलन में अपने विचार प्रस्तुत करते हुए बताया, “आजकल के डेटा प्रोटेक्शन की आवश्यकताओं को देखते हुए डिजिटल कंपनियां, विशेषकर सोशल मीडिया उद्यमियों को ये ध्यान में रखना चाहिए कि उनके मंच सुरक्षित हों, सच्चे हों, और हर देश की संप्रभुता और अखंडता का सम्मान करे। ऐसा न करने वालों के लिए विश्व अधिक उदार नहीं हो सकता”।

इसके अलावा रविशंकर प्रसाद ने इस सम्मेलन में भारत के संभावित डेटा प्रोटेक्शन कानून के बारे में भी बात की, और ये भी बताया कि कैसे भारत वैश्विक सप्लाई चेन में अपनी जगह स्थापित कर विश्व की सभी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए हरसंभव सहयोग दे सकता है। उन्होंने ये भी वादा किया कि पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत वैश्विक सप्लाई चेन के निवेश हेतु एक आकर्षक स्थल के रूप में जल्द ही विकसित होगा।

अब आप सोच रहे होंगे कि इसमें सोशल मीडिया कंपनियें को क्या संदेश दिया गया होगा? दरअसल, इसी बयान में उन्होंने एक अप्रत्यक्ष संदेश भेजा है – यदि सोशल मीडिया कंपनीयां भारत की संस्कृति और राष्ट्रीय अखंडता का सम्मान करे, और उसे अपमानित करने वाले किसी भी कंटैंट को अपने प्लैटफ़ार्म पर जगह न दे, तो भारत के पास कोई कारण नहीं है कि वो किसी सोशल मीडिया प्लैटफ़ार्म पर कोई रोक लगाए, चाहे वह फ़ेसबुक हो या कोई और।

ऐसा रविशंकर प्रसाद ने इसलिए कहा क्योंकि पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया में ये चर्चा ज़ोरों पर है कि टिक टॉक पर भारत के प्रतिबंध से फ़ेसबुक के सीईओ मार्क ज़ुकरबर्ग काफी सहमे हुए हैं। उन्हें लगता है कि भारत उनकी कंपनी पर भी प्रतिबंध लगा सकता है। रविशंकर प्रसाद का यह बयान इस बात का स्पष्टीकरण है कि भारत ऐसा कोई भी निर्णय नहीं लेगा, लेकिन यदि कोई सोशल मीडिया प्लैटफ़ार्म भारत के हितों के साथ समझौता करेगा, तो भारत उसे छोड़ने वाला भी नहीं है।

जब टिक टॉक समेत 59 चीनी एप्स पर भारत ने पूर्णतया प्रतिबंध लगाया था, तो ये स्पष्ट कहा गया था, “ हमारे पास विश्वसनीय सूचना है कि ये एप ऐसे गतिविधि में लगे हुए थे, जिससे हमारी संप्रभुता और अखंडता और रक्षा को खतरा था, इसलिए हमने ये कदम उठाए।” यही नहीं सरकार ने संकेत दिया है कि आगे भी इसी तरह के और भी कदम उठाए जा सकते हैं।

टिक टॉक की भांति फेसबुक और ट्विटर पर भी अश्लील, भड़काऊ और कभी-कभी तो देशद्रोही कंटेट को भी भरपूर बढ़ावा दिया जाता है, और अगर विरोध में एक भी स्वर उठता है तो उसे दबाने में ट्विटर और फेसबुक कोई कसर नहीं छोड़ते। उदाहरण के लिए अमूल को ही देख लीजिये। पिछले महीने अमूल ने अपनी एक रचनात्मक पोस्ट में चीन के ड्रैगन और मशहूर video sharing platform टिकटॉक को बहिष्कार करने का संदेश दिया था। उस पोस्ट में अमूल ने लिखा था “Exit the dragon” यानि “ड्रैगन का त्याग कर दो”। बस फिर क्या था, इस पोस्ट से ट्विटर इतना चिढ़ गया कि उसने Amul के अकाउंट को ही कुछ समय के लिए restrict कर दिया और उस ट्वीट को हटा दिया था। जनता के भारी विरोध के चलते ट्विटर को अमूल के अकाउंट को पोस्ट सहित बहाल करना पड़ा।

इतना ही नहीं, अभी हाल ही में जब प्रशांत भूषण के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक अवमानना के अंतर्गत मुकदमा चलाने की स्वीकृति दी, तो ट्विटर इंडिया को भी हड़काते हुए कहा कि ऐसे भड़काऊ और अपमानजनक कंटेंट पर लगाम लगाने की ज़िम्मेदारी से वो बिलकुल नहीं बच सकते। ऐसे में रवि शंकर प्रसाद के बयान से ये फिर सिद्ध हुआ है कि सरकार का सोशल मीडिया कंपनीज़ को संदेश स्पष्ट है – कायदे में रहोगे तो फायदे मैं रहोगे।

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