कांग्रेस पर टूटी एक और बड़ी मुसीबत, मनमोहन सिह और राहुल

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कांग्रेस में युवा नेताओं और बुजुर्ग नेताओं के बीच सियासी घमासान काफी तेज हो गया है। दोनों खेमों के बीच सियासी घमासान तेज होने से विद्रोह जैसे हालात बनते दिख रहे हैं। राज्यसभा सांसदों की गुरुवार को हुई बैठक के दो दिन बाद ही कांग्रेस में अंतर्विरोध खुलकर सामने आ गया। राहुल समर्थक युवा ब्रिगेड ने यूपीए दौर के नेताओं पर कांग्रेस की मौजूदा दुर्दशा के लिए सवाल खड़े किए हैं।

पुराने नेताओं ने भी किया जवाबी हमला
वहीं पुराने नेताओं ने भी जवाबी हमला किया और पिछले लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी के नेतृत्व में मिली करारी हार पर अंगुली उठाई। पार्टी के कई वरिष्ठ नेता पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के समर्थन में आए और उनके समर्थन में ट्वीट किए।

राज्यसभा सांसदों की बैठक से हुई घमासान की शुरुआत
कांग्रेस के युवा और अनुभवी नेताओं के बीच सियासी घमासान की शुरुआत गुरुवार को राज्यसभा सांसदों की बैठक से हुई। यह बैठक पार्टी की अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा मौजूदा हालात पर चर्चा करने के लिए बुलाई गई थी। लेकिन यह बैठक अपने एजेंडे से भटक गई क्योंकि पार्टी के एक वरिष्ठ नेता और सांसद ने प्रमुख मुद्दों पर पार्टी के अंदर समन्वय की कमी का मुद्दा उठाया।

पार्टी को आत्मनिरीक्षण करने की आवश्यकता
सांसद ने कथित तौर पर कहा कि पार्टी को आत्मनिरीक्षण करने की आवश्यकता है। पार्टी के एक अन्य नेता ने कहा कि पार्टी को पीएम नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार के खिलाफ एकजुटता दिखानी चाहिए मगर हम आपसी गतिरोध में उलझे हुए हैं। हम आम जनता की नजरों में खुद को आपस में उलझा हुआ दिखा रहे हैं जो कि भाजपा की सोच को बढ़ावा देने वाला है।

पार्टी के अंदर दरार हुआ उजागर
इस बैठक में मनमोहन सिंह सरकार में मंत्री रहे कई पूर्व केंद्रीय मंत्रियों और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के करीबी नेताओं के बीच मतभेद उभर कर सामने आया है। जिससे पार्टी के अंदर दरार एक बार फिर उजागर हो गया है। कांग्रेस ने 2014 में अपनी सत्ता गंवा दी थी।

पार्टी नेतृत्व सवालों के कटघरे में
इस बीच यूपीए में मंत्री रह चुके वरिष्ठ नेता मनीष तिवारी ने कहा कि नेतृत्व के असमंजस की स्थिति अब लंबे समय तक स्वीकार नहीं की जा सकती। तिवारी ने राजनीतिक आधार खिसकने के लिए पुरानी पीढ़ी को जिम्मेदार ठहराने के लिए राजीव सातव पर निशाना साधा। उन्होंने पार्टी नेतृत्व को ही सवालों के कटघरे में खड़ा कर दिया।

उन्होंने कहा कि इस सवाल की पड़ताल जरूर होनी चाहिए कि क्या 2014 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस के खराब प्रदर्शन के लिए यूपीए सरकार जिम्मेदार थी? क्या यूपीए के अंदर ही ऐसी साजिश रची गई थी?

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने दिया भाजपा का उदाहरण
यह मुद्दा शनिवार को भी जारी रहा पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी ने ट्वीट कर पार्टी के युवा नेताओं के सामने भाजपा का उदाहरण पेश कर दिया है। उन्होंने ट्विटर पर लिखा कि भाजपा 2004 से 2014 तक 10 साल सत्ता से बाहर रही मगर इस हालत के लिए पार्टी में किसी ने अटल बिहारी वाजपेई या उनकी सरकार को जिम्मेदार नहीं ठहराया।

पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर , आनंद शर्मा और मुंबई कांग्रेस के पूर्व प्रमुख मिलिंद देवड़ा ने भी पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी की बातों का समर्थन किया है।

मिलिंद देवड़ा ने क्या कहा?
मिलिंद देवड़ा ने कहा कि 2014 में पद छोड़ते समय डॉ मनमोहन सिंह ने कहा था कि इतिहास मेरे प्रति उदार रहेगा। देवड़ा ने अपने ट्वीट में कहा कि क्या उन्होंने कभी यह कल्पना की होगी कि उनकी ही पार्टी के कुछ लोग देश के प्रति उनकी सालों की सेवा को खारिज कर देंगे और उनकी विरासत को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेंगे। वह भी उनकी मौजूदगी में?

शशि थरूर ने भी किया ट्वीट
पार्टी के एक और वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर भी यूपीए सरकार की खामियों से जुड़े बयान पर खासे नाराज हैं। उन्होंने भी मनीष तिवारी और मिलिंद देवड़ा के सुर में सुर मिलाया है। उनका कहना है कि यूपीए के क्रांतिकारी 10 सालों को दुर्भावनापूर्ण विमर्श के साथ कलंकित कर दिया गया।

थरूर का कहना है कि कांग्रेस को मजबूत बनाने के लिए काफी मेहनत करने की जरूरत है और हमें हार से सबक सीखना होगा। लेकिन इसके साथ ही हमें इस बात का भी ध्यान रखना होगा कि हम अपने वैचारिक शत्रुओं के हिसाब से चलकर अपने लक्ष्य को नहीं हासिल कर सकते।

मनमोहन समेत कई नेताओं ने मौन साधा
राज्यसभा सांसदों की जिस बैठक में युवा नेताओं और वरिष्ठ नेताओं के बीच घमासान छिड़ा, उसमें पूर्व प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह, पूर्व रक्षा मंत्री एके एंटनी, राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद और पार्टी के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल भी मौजूद थे।

अनबन की खबरों का खंडन
हालांकि इन नेताओं ने किसी भी पक्षी का साथ नहीं दिया और वे बैठक के दौरान मौन साधे रहे। यूपीए-2 पर उठे सवालों से मनमोहन सिंह असहज जरूर दिखे मगर उन्होंने इस बाबत अपना पक्ष नहीं रखा। वहीं कांग्रेस सांसद ने बैठक के दौरान किसी तरह की अनबन की खबरों का खंडन किया। राज्यसभा सांसद राजीव सातव ने कहा कि यह बैठक “बेहद फलदायी” रही।

अपनी जमीन बचाने की कोशिशों में जुटी कांग्रेस
साल 2019 में लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद कांग्रेस लगातार संघर्ष कर रही है और अपनी जमीन बचाने की कोशिशों में जुटी हुई है। अब इस बीच ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे दिग्गज नेताओं ने पार्टी को छोड़ दिया, जबकि राजस्थान में तो एक अन्य युवा नेता सचिन पायलट ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खिलाफ बगावत कर दी है।

अनिश्चित और अभावग्रस्त नेतृत्व से संकट में पार्टी
कांग्रेस नेताओं ने भी माना है कि एक अनिश्चित और अभावग्रस्त नेतृत्व के चलते पार्टी संकट में पड़ गई है। हालांकि कांग्रेस के अंदर आई दरार अब सार्वजनिक है, इस मसले पर अब तक शीर्ष नेतृत्व से कोई औपचारिक बातचीत नहीं हुई है। पार्टी के प्रवक्ता जयवीर शेरगिल ने पार्टी के अंदर चल रही तनातनी की खबरों को नकारते हुए कहा कि पुराने और नए लोगों के बीच लड़ाई की कहानी एक ‘कल्पना’ पर आधारित है।

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