गुंजन सक्सेना : जाह्नवी कपूर अभिनीत फिल्म द कारगिल गर्ल में IAF को गलत ढंग से पेश करने पर वायु सेना ने लताड़ा

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भारतीय सुरक्षा बलों को नकारात्मक तरह से दिखाने का रिवाज बॉलीवुड में काफी समय से रहा है। 1990 के दशक के अंत से प्रारम्भ हुआ यह रिवाज ‘मैं हूँ ना’, ‘शौर्य’, ‘चक्रव्यूह’ जैसे फिल्मों में भारतीय सेना और सीआरपीएफ़ के सिपाहियों का नकारात्मक चित्रण काफी सुर्खियों में आया। परंतु, धर्मा प्रोडक्शन्स द्वारा हाल ही में निर्मित और नेट्फ़्लिक्स पर प्रदर्शित बायोपिक, ‘गुंजन सक्सेना, ‘द कारगिल गर्ल’ में सभी सीमाएं लांघते हुए, भारतीय वायुसेना का बेहद नकारात्मक चित्रण किया गया है, जिसके लिए अब स्वयं भारतीय वायुसेना ने फिल्म के निर्माताओं को आड़े हाथों लिया है।

भारतीय वायुसेना ने अपने पत्र में लिखा है कि, ‘जब गुंजन सक्सेना पर बायोपिक के सिलसिले में धर्मा प्रोडक्शन्स ने बातचीत की थी, तो उनके प्रवक्ता ने वायुसेना को लिखित आश्वासन दिया था कि वे किसी भी स्थिति में एयर फोर्स का नकारात्मक चित्रण नहीं करेंगे। वो पूरी फिल्म को इस तरह रखेंगे जिससे आईएएफ़ से जुड़ने के लिए अनेकों युवा प्रेरित भी हों’। बता दें कि, जान्हवी कपूर अभिनीत ‘गुंजन सक्सेना – द कार्गिल गर्ल’ में पूर्व आईएएफ़ अधिकारी, स्क्वाड्रन लीडर [तब फ्लाइट लेफ्टिनेंट] गुंजन सक्सेना पर आधारित है, जिन्होंने 1999 के कार्गिल युद्ध के दौरान बतौर एक वायुसेना अफसर, युद्धक्षेत्र में हेलीकाप्टर उड़ाने वाली प्रथम महिला पायलट बनी थी।

परंतु जब फिल्म का ट्रेलर प्रदर्शित हुआ और जब वायुसेना के अधिकारियों ने फिल्म देखी, तो उन्हें समझ में आया कि, अपने वादे के ठीक उलट, धर्मा प्रोडक्शन्स ने भारतीय वायुसेना को एक ऐसे संगठन के तौर पर चित्रित किया है, जहां महिलाओं का अपमान किया जाता था और उनके साथ भेदभाव होता था। इसीलिए भारतीय वायुसेना ने अपने पत्र में फिल्म निर्माताओं को ये भी कहा है कि, ‘गुंजन सक्सेना’ के फिल्म निर्माता या तो इन दृश्यों को एडिट करें, या फिर इन्हें फिल्म से हटाएँ।

भारतीय वायुसेना के आरोप पूरी तरह निराधार भी नहीं है, क्योंकि इस फिल्म के ट्रेलर और कई अहम दृश्यों में यह जताने का प्रयास किया गया था कि, पुरुष अफसरों को महिला अफसरों से परहेज़ होता है और वे उनके साथ फ्लाइंग मिशन में जुड़ना नहीं चाहते। हर समय उन्हें उनकी पहचान के बारे में याद दिलाते थे कि, वे महिला हैं और पुरुषों की तुलना में ‘दुर्बल’ हैं। लेकिन अफसरों का ऐसा चित्रण पूरी तरह से गलत है। निस्संदेह, महिलाओं का सैन्यबलों से मेडिकल सेवा के अतिरिक्त जुड़ना एक अनोखी बात थी, लेकिन कई पूर्व महिला अफसरों के अनुसार, स्वयं पुरुष अफसर उन्हें बेहतर काम करने के लिए प्रोत्साहित करते थे और बराबरी के लिए हरसंभव प्रयास भी करते थे।

हालांकि, बॉलीवुड के रिवाज को देखते हुए ये कोई हैरानी की बात भी नहीं है। भारतीय वायु सेना या अन्य सुरक्षाबलों को सम्मानजनक रूप से बहुत ही कम फिल्मों अथवा वेब सीरीज़ में चित्रित किया गया है। ‘मैं हूँ न’, ‘शौर्य’, ‘हैदर’ जैसी फ़िल्में और हाल ही में प्रदर्शित ‘कोड एम’, ‘घोल’ जैसे कई वेब सीरीज़ हैं, जिन्होंने भारतीय सेना और भारतीय सुरक्षाबलों का बेहद नकारात्मक चित्रण किया है। हाल ही में, रक्षा मंत्रालय ने एक पत्र में ये स्पष्ट किया है कि, अब किसी भी फिल्म निर्माता अथवा निर्देशक को यदि भारतीय सेना से जुड़ी कोई भी फिल्म अथवा वेब सीरीज़ बनानी है, तो उन्हें सबसे पहले रक्षा मंत्रालय से एनओसी यानि NO Objection Certificate लेना पड़ेगा , तभी जाकर उन्हें फिल्म बनाने की अनुमति होगी।

सच कहें तो वायुसेना का यह सख्त रुख स्वागत योग्य है, क्योंकि भारतीय सैन्यबलों का बॉलीवुड या किसी अन्य फिल्म उद्योग द्वारा अपमान अब और नहीं। यदि बॉलीवुड को सैन्य बलों पर फिल्में या वेब सीरीज़ बनानी है, तो उन्हें इस बात का पूरा ध्यान रखना होगा कि, भारतीय सेना या किसी भी भारतीय सुरक्षाबल का अनावश्यक अपमान न हो।

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