भारत की मार से बौखलाया चीन, दे डाली युद्ध की धमकी

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पेइचिंग। भारत के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के लोकसभा में चीनी सेना की पोल खोलने पर पर ड्रैगन का सरकारी भोपू ग्‍लोबल टाइम्‍स भड़क उठा है। चीन के सरकारी अखबार ग्‍लोबल टाइम्‍स के एडिटर हू शिजिन ने कहा कि चीन शांति और युद्ध दोनों ही के लिए तैयार है। उन्‍होंने दावा किया कि चीनी सेना के दबाव की वजह से भारतीय सेना नरम रुख अपनाने पर मजबूर हुई है।

शिजिन ने दावा किया कि पीएलए पैंगोंग झील के पास भारत-चीन सीमा पर निर्णायक कार्रवाई के लिए अपनी तैनाती को बढ़ा रही है। ग्‍लोबल टाइम्‍स के एडिटर ने कहा कि बीजिंग को चीन-भारत सीमा विवाद को शांतिपूर्वक सुलझाने के लिए प्रयास करते रहना चाहिए लेकिन अपनी सेना को तैयार रखना होगा। उन्‍होंने कहा कि भारत में कई अलग-अलग ताकते हैं। कुछ अति राष्‍ट्रवादी हैं जिन्‍होंने आसान रास्‍ते पर जाने से मना कर दिया था और कहा था कि वे अपने सख्‍त रुख पर बने रहेंगे।

‘चीनी सेना भारत को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार’
श‍िजिन ने चीनी विदेश मंत्रालय को सलाह दी कि वह भारत के साथ वार्ता करते समय उसी भाषा का इस्‍तेमाल करें जो भारत समझता है। इससे पहले शिजिन ने कहा था कि चीनी सेना भारतीय टैंकों का खात्‍मा करने का अभ्‍यास कर रहे हैं। उन्‍होंने यह भी धमकी दी कि अगर भारत ने मास्‍को में विदेश मंत्रियों के बीच हुई पांच सूत्री सहमति को लागू नहीं करता है तो चीनी सेना भारत को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार है।

इससे पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को लोकसभा में चीन की पोल खोलकर रख दी थी। सिंह ने सदन को चीनी सेना की पूरी गतिविधियों के बारे में बताया। उन्‍होंने बताया कि किस तरह चीनी सैनिकों ने यथास्थिति को बदलने की एकतरफा कोशिश की। उन्‍होंने भारतीय सेना के शौर्य की तारीफ करते हुए कहा कि हम अपनी सीमा की सुरक्षा में सफल रहे हैं। उन्‍होंने कहा कि इस तनावभरे माहौल में ‘हमारे बहादुर जवानों ने जहां संयम की जरूरत थी वहां संयम रखा तथा जहां शौर्य की जरुरत थी, वहां शौर्य प्रदर्शित किया।’
राजनाथ सिंह ने लोकसभा में शुरू से पूरा घटनाक्रम समझाया। उन्‍होंने कहा, “अप्रैल माह से पूर्वी लद्दाख की सीमा पर चीन की सेनाओं की संख्या तथा उनके हथ‍ियारों में इजाफा देखा गया। मई महीने के प्रारंभ में चीन ने गलवान घाटी क्षेत्र में हमारे सैनिकों के परंपरागत पैट्रोलिंग पैटर्न में रुकावट डाली जिससे फेसऑफ की स्थिति पैदा हुई। हमने चीन को डिप्‍लोमेटिक तथा मिलिट्री चैनल्‍स के माध्यम से यह अवगत करा दिया, कि इस प्रकार की गतिविधियां, यथास्थिति को एकतरफा बदलने का प्रयास है। यह भी साफ कर दिया गया कि ये प्रयास हमें किसी भी सूरत में मंजूर नहीं है।”

रक्षा मंत्री ने चीन की चालों का खुलासा करते हुए आगे कहा, “एलएसी पर तनाव बढ़ता हुआ देख कर दोनों तरफ के सैन्य कमांडरों ने 6 जून 2020 को मीटिंग की। इस बात पर सहमति बनी कि बराबर कार्रवाई के जरिए डिसएंगेजमेंट किया जाए। दोनों पक्ष इस बात पर भी सहमत हुए कि एलएसी को माना जाएगा तथा कोई ऐसी कार्रवाई नहीं की जाएगी, जिससे यथास्थिति बदले। इस सहमति के उल्‍लंघन में चीन ने एक हिंसक फेसऑफ की स्थिति 15 जून को गलवान में बनाई गई। हमारे बहादुर सिपाहियों ने अपनी जान का बलिदान दिया पर साथ ही चीनी पक्ष को भी भारी क्षति पहुचाई और अपनी सीमा की सुरक्षा में कामयाब रहे। इस पूरी अवधि के दौरान हमारे बहादुर जवानों ने, जहां संयम की जरूरत थी वहां संयम रखा तथा जहां शौर्य की जरुरत थी, वहां शौर्य प्रदर्शित किया।”

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